इस मज़े कि बड़ी सजा है

From Facebook article of Shri. Pawanji

इस “मजे, की बड़ी “सजा, है….!
रोहिणी अपने पापा की प्यारी सी बेटी थी।2004 में ग्यारहवीं के दौरान पापा ने कम्प्यूटर दिलवाया था।उसमे नेट भी था।एक दिन पापा का कम्प्यूटर नही चल रहा था सोचा रोहिणी वाले कम्प्यूटर में काम कर लूं,…. खोला……………………..

अब रोहिणी के अपने बाल-बच्चे हैं। समझ तो गये ही होंगे….परेशान बाप ने जल्दबाजी में क्या फैसला लिया।
नाम बदल दिया गया है घटना सच्ची है।
……..आप क्या सोच रहे हैं मैं उससे आत्महत्या करवा देता?
नही!
अपराध-बलात्कार-मानसिक दिवालियापन वगैरह तो “नेट पोर्न साइट्स,, के स्वाभाविक परिणाम है।
इस घटना से
हमने एक “साइंटिस्ट” खो दिया!
जो शायद “टेसी….,की उत्तराधिकारी हो सकती थी।
आखिर “चक्षु-काम-सुख, के अपने खुद के भी कुछ गहरे और “अंतर्निहित दुष्परिणाम, है।
कौन भुगतेगा?
एक उम्र में जब समझ नही होती तो वह और आकर्षित करता है।
हर मजे का एक सजा होता है इसे मजे की कीमत आने वाली पीढ़िया तो चुकाएंगी ही “कैश-माल, मंत्रालय उड़ा रहा है..!
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2009, 2012 और पहले बने – IT Act Section 67, 67(A), 67(B), 69(A)
….सिर्फ लागू करना है।लागू करने में मंत्रालय ने एक भी कदम नहीं उठाया है।आज तक एक भी वेबसाइट इनके तहत बंद नहीं की गई है?
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मोबाईल फोन द्वारा ईंटरनेट, दुकानों पर मेमोरीकार्ड ब्लूफिल्म, व्हाट्सएप्प पर आदान-प्रदान इसके सबसे प्रचलित तरीके हैं।इस समय 30-70% तक इंटरनेट की खपत अश्लील साइटों की है।
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2013 अप्रैल से लागू करने को लेकर मंत्रालय नहीं-नहीं की रट लगाए है।
IT मंत्रालय द्वारा ISPकंपनी का बचाव
ISP कंपनी कहती है कि उन्हें ऐसी अश्लील साइटों की सूची दी जाए ताकी सब कंपनियाँ समान रुप से उन्हें रोकें।कंपनियाँ स्वयं सूची बनाने से बचती हैं और सूची के लिए सरकार पर निर्भर करती हैं।
– मंत्रालय और सरकारी वकील इन कंपनियोँ का बचाव करते हुए तकनीकी रुप से असंभव होने का रोना रोते हैं।यह बात कंपनियाँ स्वंय कभी नहीं कहती।
– सरकार वयस्क साइट पर रोक के बने हूए कानून को अमल में लाने से कतरा रही है।
– 857 साइट की सूची अक्टूबर 2014 की सुनवाई के दौरान कमलेश वासवानी ने कोर्ट को और IT मंत्रालय को दी थी। यह सभी साइट जाँच में अश्लील पाइ गई हैं।
– सरकारी वकील ने आठ महीने बाद की 8-जुलाई की सुनवाई में सूची के खो जाने की फूहड़ दलील भी दी थी।
– बंद कमरे में ड्रग्स प्रतिबंधित हैं पर पोर्न देखने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दलील दे रहे हैं। सामाजिक अपराध को जन्म देने वाली सोच बंद कमरे के बाहर असर दिखाती है।
– 10-अगस्त को भी सरकारी वकील नें दो से तीन महीने का समय मांगा।
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आई टी मंत्रालय की नीयत का प्रमाण है इस तरह के साईट्स पर एक किसी अनजाने से जिम्मेदार वकील की “पीआईएल,पर सुप्रीम कोर्ट में मंत्रालय द्वारा दाखिल जबाब….”यह किसी भी टेक्नोलोजी से रोका ही नही जा सकता,इसलिए सरकार इसे नही रोक सकती..!””…और भी कई बातें ,,…!
बीएचयू आईआईटी से पढ़े श्री सुरेश शुक्ला,…..ने कई बर्ष पहले एक घटना के चलते इसी “उद्देश्य, के चलते बड़ी कम्पनी की मोटी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ दी थी और अब बनारस में रह रहे।
पति-पत्नी जुट गये थे एंटी-पोर्न साफ्टवेयर बनाने में….उनको किसी ने बताया कि सरकार में सुप्रीम कोर्ट में ये हलफनामा लगाया है…….सूना है सरकार की कोशिश थी पीआईएल डिसमिस हो…सब कुछ पीक पर था …. तभी अचानक शुक्ला जी हलफनामा लेकर प्रकट हुए!… “बोले बिलकुल संभव है जैसे चाहे जिसे चाहे वैसे ब्लाक करे सरकार ये रही टेक्नालाजी और इसे कोई भी अपना सकता है……टेक्निकली प्रूव कर सकता हूँ…….सब सन्न…….मंत्रालय की गजब किरकिरी…….फ़िलहाल केस चल रहा है…
….तरह-तरह के बहाने खोजकर सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में देरी की जा रही है।हर बिताया दिन किसी को बचाने की कोशिश रहती है!लगता है मंत्रालय का उद्देश्य संस्कृति का संरक्षण या राष्ट्रीय चरित्र क़ी सुरक्षा न होकर कुछ और ही है?
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पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगा फिर हटा!
31 जुलाई को “गृह मंत्रालय,,ध्यान दीजिये “गृहमंत्रालय”, की पहल पर उसके द्वारा भेजे गये निर्देश से 857 अश्लील साइट रोकने का आदेश जारी हुआ था न कि आईटी मंत्रालय।
सबसे बड़ी कंपनियाँ – बीएसएनएल (BSNL), एयरटेल(Airtel)रिलायंस (Reliance) टाटा (Tata communications) पूरे भारत में और बाकी ISP कंपनियों को इंटरनेट पहुँचाती हैं।इनमें से सिर्फ BSNL ने इसका पालन किया।
निजी ISP कंपनियों को मोबाइल डाटा-पैक की बढ़ी बिक्री से बड़ा मुनाफा होता है।रोक लगाने से यह मुनाफा काफी कम होने की आशंका है।
सिर्फ Airtel की 2015 साल की पहली तिमाही में 2,300 करोड़ सिर्फ मोबाइल डाटा-पैक से बिका।
50% पोर्न साइट के अनुमान से 1,150 करोड़ का प्रति तिमाही का कारोबार रुक जाता।
यानी कुल मिलाकर 12 हजार करोड़ की इकोनामी “मजे लेने,की है स्वाभाविक है “मलाई के चक्कर,,… में देश का भविष्य चूल्हे भाड में झोका जा रहा है।
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मनमाना लाभ उठा रही निजी कंपनियों को संस्कृति के इस “महान मंत्रालय,, पर इतना भरोसा था कि उन्होंने एक मिनट के लिए भी साइट नहीं रोकी। उनके भरोसे का कारण मंगलवार की शाम तक स्पष्ट हुआ।आईटी मंत्रालय ने आदेश को उलझाना शुरु कर दिया और सारा निर्णय ISP कंपनियों पर छोड़ दिया। मजबूरन सरकारी कम्पनी BSNL ने सारी साइट गुरुवार तक चालू कर दी।
किसी निजी कंपनियों ने तो रोका ही नहीं था।
इन्ही कंपनियों का पैसा डिजिटल-इंडिया में भी लगा हुआ है। इनके मुनाफे में किसी गिरावट का असर सरकार के कुछ आधिकारियों के “लाभ के उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम, पर पड़ सकता है!
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दरअसल मंत्रालय ने “कुछ कंफ्यूज,,गैर-जिम्मेदार लोगों की प्रतिक्रिया का सहारा लेकर और बाल-पोर्न साइट के बहाने से मामला उलझाने की कोशिश की है।सारे अभिभावक यही सोच रहें हैं कि आखिर रोक हटाई क्यों?
बाल-पोर्न साइट अमेरिका,जर्मनी आदि जैसे विकसित देशों की एजेंसियाँ खोज-खोज कर बंद कराती रहती हैं।दुनियां भर में बहुत सारे देश इस तरह की साइटों को पूरी तरह बैन रखते हैं।सारी साइटस के मुख्यालय और संचालन केंद्र विदेशों में है जहाँ उनकी एजेंसियाँ उच्च तकनीकों एवं साफ्टवेयर के द्वारा उनको नियंत्रित कर लेती हैं।असल में हमारे सरकार के मंत्रालय को कुछ करने की जरूरत ही नहीं है,वहां एक बना-बनाया ढर्रा चला आ रहा है,इस तरह की साइटों को डेली-वाइज चलाओ उसका एक बड़ा “हिस्सा माल,की तरह पहुंचता रहे,वे किसी न किसी तरह इन चकलाघरों के लिए तर्क ढूँढ ही लेते हैं।केवल मुफ्तखोरी का मोटा-माल चाहिए ये “जिस्म-खोरी दर्शन,का कमीशन वह बे-रोक टोक मिल ही जाता है।
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न हर्र न फिटकरी माल चोखा!
पोर्न साईटस के घिनौने पहलू-पर नजर डालिए।
अधिकतर साईट,स विदेशों में बनी कंपनियाँ चलाती हैं। इन्हें सिर्फ देखा जा सकता है।लोग लोड करते हैं और “चक्षु-लाभ,तथा अपने “अतृप्त काम-पिपासा, के लिए एक रकम का भुगतान करते हैं,और समाज को घिनौने,गंदे नजरिये से देखते हैं,उनके लिए उनका यौनसुख ही जीवन का महान कर्म बन जाता है।
कई साईटस पर फेसबुक की तरह आम आदमी अश्लील चित्र और वीडियो डाल सकता है,इसका लाभ भी यही कम्पनियां उठाती हैं।प्राय: छोटी बच्चियों के और आपके व्यक्तिगत पलों के मजे कम्पनियां उठाती है। जल्द ही यह दुनिया भर में वाइरल हो जाता है। हम किस चीज को बढावा दे रहे हैं?
हाल की घटनाओं में कुछ बलात्कारियों ने “दुष्कृत्य का वीडियो, बनाकर लड़की को धमकाया कि किसी से न कहे!
इस डर से लड़कियाँ और उनके परिवार चुप्पी साध लेते हैं। FIR करने पर इन वीडियो को कई साइट पर डाला जाता है और लड़की के जानने वालों को भी भेजा जाता है। पलक झपकते ही जीवन बर्बाद!अमूमन लड़की के पास आत्महत्या के अलावा कोई चारा नहीं बचता।
ये साइटस अपराधियों के हाथ का हथियार बन गई हैं।
देश भर से 1700 से भी अधिक इस तरह की घटनाओं की सूचनाये पटल पर है।
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पूरब के विकसित देश “दक्षिण कोरिया,जापान,मलेशिया,आदि में पूर्ण प्रतिबंध है,
दक्षिण कोरिया भारत की तरह प्रजातांत्रिक देश है।वहाँ के मंत्रालय ने आंकड़े जुटा के देखा कि महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध 5 गुना तक बढ़े।सरकार को पाश्चात्य देश ही नजर आते हैं,उनके उदाहरण रखते हुए वह तर्क रखती है कि “पोर्न प्रतिबन्ध से हमारी छवि “तालिबानी, बन रही थी,….ध्यान दीजिये “चुनाव के पहले यही अपसंस्कृति थी,,.माल आया नही की तर्क बदल गये?
…मतलब की इस बीच पिछले 20 सालों में इस तरह के इस्तेमाल से जो “30 गुना बढ़े, अपराध का क्या होगा?
यह आंकड़ा आईटीमंत्रालय,गृह मंत्रालय जान बूझ कर ओपन नही होने देना चाहता!
पश्चिमी देश तो खुद ही इन समस्याओं से बुरी तरह परेशान हैं…और रास्ते खोज रहे हैं।
सुनो संस्कृति के पुरोधाओं!
“” इसी नाम पर सत्ता में आये हो अपने भविष्य की रक्षा करो,…..
…कुतर्क मत गढो!
दुनियां साफ़ और अच्छी तरह जानती है ‘आईटी मंत्रालय” क्यों और कब से महत्वपूर्ण हुआ है।
हमारा देश एक डिफरेंट तरह की संस्कृति का देश है हमे खुल कर उस संस्कृति और जीवन-पद्दति की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से आगे आना चाहिए।नही तो हम उनकी तरह (पश्चिमी देशों)आने वाली पीढियों के छोटी-छोटी बच्चियों के छोटे-छोटे बच्चो के ‘पालना गृह,बनाने की संस्कृति अपनाने के लिए तैयार रहें।

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